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यदि नहीं हो रही हो आपकी शादी

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वास्तुशास्त्र के अनुसार लड़कियों का शयन कक्ष वायव्य में होना चाहिए। प्राचीन वास्तु ग्रन्थों में वायव्य कोण में क्या निर्माण किया कैसे किया जाए इस बारे मे जानकारी मिलती है।

यही कारण है कि शादी करने योग्य लडकी का वायव्य कोण में शयन कक्ष होने से उसका विवाह शीघ्र हो जाता है।कहा जाता है कि इस कोण में सोने वाले व्यक्ति की शहर से बाहर ट्रांसफर होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

  • वायव्य कोण में वसूली के लिए रोज शहर से बाहर जाने वाले लोग, चिकित्सक, प्रतिनिधि और वास्तु सलाहकार बनते हैं।
  • भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार किसी भी प्लाट या भवन की आठों दिशाओं को हमारे सौरमण्डल में उपस्थित नवग्रह प्रभावित करते हैं और प्रत्येक ग्रह किसी एक दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और प्रत्येक दिशाओं का कोई एक अधिपत्य देवता है।
  • वायव्य कोण का प्रनिधित्व ग्रह चंद्र है और इसके अधिपत्य देव वायुदेव हैं। चंद्र ग्रह और वायुदेव दोनों की प्रकृति ही चलायमान है। इस कारण यहां कुछ भी रखा हो वह यहां टीक नहीं पाता। यही कारण है कि वास्तुविदों द्वारा वास्तुनुकूल बने उद्योगों में तैयार माल को वायव्य कोण में रखवाया जाता है ताकि वह जल्दी बिक जाए।
  • दुकानों के वायव्य कोण में रखा सामान दूसरी दिशाओं और कोणों की तुलना में जल्दी बिकता है। वायव्य कोण की इसी प्रकृति के आधार पर वर्तमान में बन रहे घरों में लड़कियों का कमरा इस कोने में बनाया जाने की सलाह वास्तुविदों द्वारा दी जाती है।
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